इस मामले की सुनवाई के दौरान कानूनी सवाल यह था कि हिन्दू विवाह अधिनियम की धारा 13बी के तहत आपसी सहमति से तलाक के लिए दंपती को एक वर्ष तक अलग रहना जरूरी होता है। महिला पक्ष की अधिवक्ता वर्षा शर्मा ने हिन्दू विवाह अधिनियम की धारा 14(2) के तहत आवेदन देकर तर्क दिया कि जब दोनों पक्ष इस शादी को स्वीकार ही नहीं कर रहे और साथ रहने की कोई संभावना नहीं है, तो केवल तकनीकी आधार पर एक साल तक वैवाहिक बंधन में बांधकर रखना अनुचित होगा। सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देकर कहा गया, यदि विवाह व्यावहारिक रूप से खत्म हो चुका हो, तो पक्षकारों को बेवजह लंबे समय तक रिश्ते में घसीटना न्यायसंगत नहीं है।
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