विक्रमशिला सेतु ने डेढ़ महीने का वक्त दिया था कि उसे ठीक से जांचा जाए। भारी वाहनों की आवाजाही पर रोक लगाई जाए। लेकिन, अफसरों ने विक्रमशिला सेतु की ही बात नहीं मानी। वह मूक है, इसलिए संकेत दिए थे। ताकि, जांच हो और इस तरह टूटकर गिरने से बच जाए। इसी तरह का अंतिम संकेत रविवार मध्य रात्रि धाराशायी होने से पहले दिया, इसलिए जानें बच गईं। नहीं तो रात में भी कम-से-कम आठ-दस लोग तो गंगा में वाहनों सहित समा ही जाते। दिन में अंतिम संकेत दिए हादसा होता तो संख्या सौ भी हो सकती थी। विक्रमशिला सेतु ने अंतिम संकेत देकर जान बचाई, लेकिन डेढ़ महीने पहले दिए संकेत पर काम होता तो आज यह खबर नहीं होती।
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