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इंदौर के बड़े हिस्से में बिजली आपूर्ति बाधित होने का खतरा, महालक्ष्मी के बाद अब चंबल ग्रिड भी ओवरलोड

इंदौर के बड़े हिस्से में बिजली आपूर्ति बाधित होने का खतरा, महालक्ष्मी के बाद अब चंबल ग्रिड भी ओवरलोड

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। शहर के तमाम हिस्सों में तेज गर्मी के बीच बार-बार बिजली गुल हो रही है। आगे स्थिति और भी बिगड़ सकती है। महालक्ष्मी नगर का 132 केवी सब स्टेशन पहले से ओवरलोड चल रहा है। अब 132 चंबल ग्रिड पर भी वहीं स्थिति बनती दिख रही है।

इस बिजली सब स्टेशन में स्थापित तीन पावर ट्रांसफार्मर 85 प्रतिशत क्षमता पर चल रहे हैं। गर्मी बढ़ने के साथ ओर मांग बढ़ी तो ओवरलोड होने के चलते इस ग्रिड में से भी कभी आपूर्ति बाधित हो सकती है। ऐसे में शहर के नार्थ डिविजन से जुड़ा बड़ा हिस्सा बिजली आपूर्ति बंद होने से परेशान होगा।

लिखित में दी है सूचना

मध्य प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) ने इंदौर क्षेत्र में बिजली वितरण करने वाली पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी को लिखित में इसकी सूचना दी है और आवश्यक प्रबंध करने के लिए चेता भी दिया है। हालांकि दोनों कंपनियों के बीच समन्वय की कमी भी साफ चाहिर हो रही है।

कंपनी किसी भी सूचना से इनकार कर रही है

पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ऐसी किसी भी लिखित सूचना व पत्र की जानकारी से ही इनकार कर रही है। नईदुनिया को जानकारी लगी है कि ट्रांसमिशन कंपनी ने पश्चिम क्षेत्र वितरण कंपनी को सूचना दी है कि 132 केवी जीआइएस महालक्ष्मी एवं 132 केवी चंबल सब स्टेशन से निकलने वाले 33 केवी फीडरों पर लोड अत्यधिक बढ़ गया है।

ट्रांसमिशन कंपनी की ओर से लिखा गया है कि यह स्थिति इसलिए बनी कि अन्य सब स्टेशनों के फीडरों का अतिरिक्त भार इन स्टेशनों पर आ गया है। पत्र में यह भी लिखा गया है कि 132 केवी जीआइएस महालक्ष्मी सब स्टेशन में केवल एक ही पावर ट्रांसफार्मर स्थापित है, जो वर्तमान में अपनी क्षमता के 90 प्रतिशत से अधिक लोड पर संचालित हो रहा है।

ओवरलोडिंग के कारण बाधित हो सकती है बिजली आपूर्ति

वहीं 132 केवी चंबल सब स्टेशन में स्थापित तीनों पावर ट्रांसफॉर्मर भी 85 प्रतिशत से अधिक क्षमता पर चल रहे हैं। ट्रांसको अधिकारियों ने आशंका जताई है कि यदि समय रहते लोड डायवर्जन नहीं किया गया तो ओवरलोडिंग के कारण विद्युत आपूर्ति बाधित हो सकती है। वितरण कंपनी का सिस्टम यदि ओवलोड होने से बंद हुआ तो इस ग्रिड से जुड़े शहर के हिस्सों में भी बिजली गुल हो जाएगी।

नहीं हो रही पहले से प्लानिंग

शहर में बिजली की मांग बढ़ने के बाद अब ऐन वक्त पर आपात प्रबंध की तैयारी की जा रही है। जानकार कह रहे हैं कि ट्रांसमिशन और वितरण कंपनियों के बीच बेहतर समन्वय नहीं होने का सीधा असर आम उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है।दरअसल किसी भी ग्रिड की क्षमता के 80 प्रतिशत मांग जाने के बाद ही उसकी क्षमता वृद्धि या लोड शिफ्टिंग के प्रबंध दोनों कंपनियों को मिलकर करना थे।

उपभोक्ताओं को समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है

हर ग्रिड पर लोड की प्लानिंग भी दोनों कंपनियों के अधिकारियों के साथ बैठकर करना चाहिए और मांग बढ़ने से पहले ही अतिरिक्त ग्रिड या क्षमता जुटा लेना चाहिए। बीते दिनों महालक्ष्मी ग्रिड से ओवरलोडिंग के कारण ही बढ़े क्षेत्र में आपूर्ति बंद हुई थी। एक ओर शहर में लगातार बढ़ती बिजली मांग है, वहीं दूसरी ओर समय पर नेटवर्क प्लानिंग और लोड बैलेंसिंग नहीं होने से अब उपभोक्ताओं को लो-वोल्टेज, ट्रिपिंग और संभावित बिजली कटौती जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

बताया जा रहा है कि वितरण कंपनी को सुझाव दिया गया है कि इंदौर नॉर्थ 220 केवी, इलेक्ट्रिक कॉम्प्लेक्स 132 केवी, निरंजनपुर 132 केवी, मंगल्या 220 केवी, नवदापंथ 132 केवी, राऊ 132 केवी एवं सत्यसाई 132 केवी जैसे अपेक्षाकृत कम लोड वाले सब स्टेशनों पर लोड स्थानांतरित कर दिया जाए ताकि आने वाली परेशानी से बचा जा सके।

पत्र नहीं मिला, लोड शिफ्टिंग नियमित प्रक्रिया

ट्रांसमिशन के पत्र या लिखित सूचना की जानकारी नहीं है। लोड शिफ्टिंग करना तो अत्यधिक मांग के दिनों में हमारी नियमित प्रक्रिया का हिस्सा है। जरुरत पड़ने पर हम वितरण सुचारू रखने के लिए लोड शिफ्ट कर ही रहे हैं। -आरके जैन, चीफ इंजीनियर पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी

वितरण कंपनी को पत्र लिखा है

लोड शिफ्टिंग करने से चंबर ग्रिड पर पड़ने वाले अतिरिक्त भार को कम किया जा सकेगा। इस बारे में लिखित सूचना वितरण कंपनी को भेजी है। महालक्ष्मी ग्रिड की क्षमता वृद्धि के लिए प्रस्ताव मंजूर हो गया है और उच्च प्राथमिकता पर क्षमता बढ़ाने का काम किया जा रहा है। -जयेश चौपड़ा, अधीक्षण यंत्री, मप्र पावर ट्रांसमिशन कंपनी

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