एसोसिएशन ऑफ इंडस्ट्रीज मध्यप्रदेश की बैठक में मीटर का उद्योगपतियों ने भारी विरोध किया। एसोसिएशन के सचिव तरूण व्यास ने बताया कि आर्थिक भार के विरोध में …और पढ़ें
HighLights
- पीक्यू मीटर को लेकर उद्योगों ने विरोध शुरू कर दिया है
- पीक्यू मीटर के विरोध में उद्योगपतियों ने बनाई संघर्ष समिति
- एसोसिएशन ऑफ इंडस्ट्रीज मध्यप्रदेश की बैठक में उद्योगपतियों ने भारी विरोध किया
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। पॉवर क्वालिटी पर निगरानी के लिए बिजली कंपनी ने उद्योगों को पीक्यू मीटर लगाने का फरमान सुनाया है। मनमाने तरीके से लगाए जा रहे इस मीटर को लेकर उद्योगों ने विरोध शुरू कर दिया है।
एसोसिएशन ऑफ इंडस्ट्रीज मध्यप्रदेश (एआइएमपी) की मासिक कार्यकारिणी बैठक में मीटर का उद्योगपतियों ने भारी विरोध किया। एसोसिएशन के सचिव तरूण व्यास ने बताया कि उद्योगों पर पड़ रहे आर्थिक भार के विरोध में औद्योगिक संगठन एकजुट हैं।
बिजली वितरण कंपनियों द्वारा लगाए जा रहे आधुनिक पीक्यू (PQ) मीटर और स्मार्ट मीटर प्रणाली का हम विरोध करते हैं। बैठक में उद्यमियों ने मीटरों को उद्योगों के लिए ‘आर्थिक बोझ’ करार दिया है। एसोसिएशन ने इस मीटर के विरोध में एक सघर्ष समिति का गठन किया है। समिति के संयोजक रोलिंग मिल एसोसिएशन के अध्यक्ष सतीश मित्तल को बनाया गया है।
मीटर के मामले में बिजली कंपनी का रूख भी संदेहास्पद है
सतीश मित्तल ने बताया कि उद्योगों का आरोप है कि नए पीक्यू मीटर सामान्य ‘वोल्टेज फ्लक्चुएशन’ और ‘पावर फैक्टर’ को भी भारी पेनाल्टी (अतिरिक्त शुल्क) के रूप में दर्ज कर रहे हैं, जिससे कई कारखानों का बिजली बिल अप्रत्याशित रूप से दोगुना तक हो जायेगा। मीटर के मामले में बिजली कंपनी का रूख भी संदेहास्पद है।
मध्यप्रदेश देश का तीसरा राज्य है जहां यह मीटर लगाने की कवायद चल रही है
मीटर की कार्यप्रणाली और तकनीकी मापदंड पारदर्शी नहीं हैं और उद्यमियों को मीटर की तकनीकी रिपोर्टिंग और रीडिंग पर गंभीर संदेह है। इसकी तकनीकी खामी के कारण उत्पादन लागत में भारी वृद्धि होगी। मध्यप्रदेश देश का तीसरा राज्य है जहां यह मीटर लगाने की कवायद चल रही है।
पंजाब व तामिलनाडू में 2500 किलो वाट के ऊपर इसे लागू किया है
पंजाब व तामिलनाडू में 2500 किलो वाट के ऊपर इसे लागू किया है जबकि मध्यप्रदेश में 100 किलो वाट पर ही इसे लागू कर दिया गया। बिजली कंपनियों ने प्रदेश में दो मीटर कंपनियों को अधिकृत कर दिया है। मीटर की किमत 50 हजार से अधिक नही है लेकिन बिजली कंपनी ने जिन्हें अधिकृत किया है वे उद्योगों को इसकी कीमत 6 लाख रुपये बता रही है।
इस प्रकिया से मध्यप्रदेश के लघु एवं मध्यम उद्योग प्रभावित होंगे। वैश्विक और राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने में पिछड़ेगे।विद्युत नियामक आयोग से इस मामले में अपील करने का निर्णय भी लिया गया है। उद्योग सदस्यों ने कहा कि पहले समिति मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग में अपनी आपत्ति दर्ज करेगी और वहां यदि सुनवाई नही होती है तो उद्योगपति कोर्ट की शरण भी लेंगे। यदि जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं हुआ तो प्रदेश के समस्त औद्योगिक संगठनों को विवश होकर एकत्रित कर आंदोलन की रूपरेखा तय करना पडेगी व इस ‘मीटर के बहिष्कार’ का रुख अपनाना पड़ेगा।
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