मानसून की आमद होने वाली है। अच्छी बरसात अगर हुई तो शहर के आसपास के बांध लबालब होना तय हैं। इसके बाद भी अभी तक प्रशासन ने बांध क्षेत्र में बनी कॉलोनियों को लेकर कोई योजना नहीं बनाई है। यही कारण है कि शहर के नजदीक अलापुर बांध की कॉलोनी में 100 से अधिक घरों में रह रहे परिवारों पर फिर खतरा आ सकता है। बीते साल अलापुर बांध के डूब क्षेत्र की 70 हेक्टेयर जमीन और उस पर बने मकानों में बांध का ओवरफ्लो पानी भर गया था। ऐसा बांध बनने के 22 साल बाद हुआ था। इसके बाद जल संसाधन विभाग ने जमीन के मुआवजे के लिए 410 करोड़ रुपए का प्रस्ताव शासन के पास भेजा था, जिस पर अब तक कोई निर्णय नहीं हो सका है। इस बांध की स्थिति को जल संसाधन विभाग ने मानसून पूर्व निरीक्षण रिपोर्ट में ठीक बताया है, बांध में कहीं कोई टूट-फूट नहीं है। यानी कि पानी भरने के लिए उपयुक्त है लेकिन पानी ओवरफ्लो हुआ तो डूब क्षेत्र के रहवासियों का क्या होगा इस पर कोई विचार नहीं किया। इन गांव की यह जमीन डूब क्षेत्र में
अलापुर -10.64 हेक्टे. हबीपुर – 25.72 हेक्टे. भाटखेड़ी – 22.59 हेक्टे. दंगियापुरा – 8.78 हेक्टे. बरऊआ (पिछोर) 2.90 हेक्टेयर 1987 में योजना बनी और 2004 में बना था बांध
अलापुर बांध बनाने की परियोजना 1987 में बनी थी। योजना के लिए वर्ष 2000 में जमीन अधिग्रहण व भुगतान की प्रक्रिया पूरी हुई और 2004 में बांध बनकर तैयार हुआ। बांध के लिए 30% जमीन का पूर्ण भुगतान किया गया जबकि 70% जमीन का शासन ने 80% भुगतान किया। 70 हेक्टेयर जमीन का पूर्ण भुगतान न होने से यह जमीन विभाग के नाम पर नहीं चढ़ सकी।
80 प्रतिशत भुगतान के बाद भी बनते गए मकान
बांध के डूब क्षेत्र की जमीन पर 80 फीसदी भुगतान के बाद भी खेतों में प्लॉटिंग कर मकान बनते रहे लेकिन जल संसाधन से लेकर प्रशासन व नगर निगम किसी भी विभाग के अफसर ने जमीन का 80 फीसदी पैसा लेने वाले लोगों पर कोई कार्रवाई नहीं की। अब जब समस्या खड़ी हो गई है तब नए-नए बहाने बना रहे हैं। बांध बनने के समय 9 से 15 लाख थी गाइड लाइन
अलापुर बांध की डूब क्षेत्र की जमीन अधिग्रहित करने के प्रक्रिया के दौरान वर्ष 2002 में 5 गांवों में जमीन की गाइड लाइन 9 से 15 लाख रुपए प्रति हेक्टेयर तक की थी। यह गाइड लाइन वर्तमान में बढ़कर 1.25 करोड़ रुपए से 4 करोड़ रुपए प्रति हेक्टेयर तक पहुंच गई। अब इसी क्षेत्र में 100 से अधिक मकान भी बन गए हैं। मुआवजा मिलने के बाद नए मालिकों का होगा सर्वे
अलापुर बांध के डूब क्षेत्र के पांच गांव की जमीन 70 हेक्टेयर जमीन का मुआवजा वितरण के प्रस्ताव पर सैद्धांतिक मंजूरी के बाद इस जमीन के नए मालिकों का सर्वे कराया जाएगा। जिस समय बांध बनकर तैयार हुआ उस समय डूब क्षेत्र के खेत थे और अब वहां पर खेतों में प्लॉट काटकर मकान बन गए हैं। रिपोर्ट भी मांगी गई है ^अलापुर बांध के डूब क्षेत्र की व्यवस्था के संबंध में नगर निगम एवं जल संसाधन विभाग के अधिकारियों को व्यवस्था बनाने के निर्देश दिए हैं। रिपोर्ट भी मांगी गई है। – रुचिका चौहान, कलेक्टर एक्सपर्ट – बरजोर सिंह यादव, सेवानिवृत्त कार्यपालन यंत्री नए बांध के लिए क्षेत्र देखें या डूब क्षेत्र से मकान हटाएं अलापुर बांध बनने के बाद मुआवजा का पूरा भुगतान न हो पाने के कारण डूब क्षेत्र में कॉलोनी बस जाने से खतरनाक स्थिति बनी हैं। मुआवजे के भुगतान के बाद ही मकानों को वहां से हटाया जा सकता है। यदि मकानों को डूब क्षेत्र से नहीं हटाया जाता तो मानसून के दौरान इस क्षेत्र पर बाढ़ संकट बना रहेगा। ऐसी स्थिति में या तो बांध को भरा ही न जाए, लेकिन बांध को सिंचाई के लिए बनाया गया है और यह सैद्धांतिक रूप से गलत होगा। अलापुर बांध के डूब क्षेत्र का मुआवजा बहुत अधिक होने पर आसपास नए बांध के लिए क्षेत्र का चयन व प्रस्ताव तैयार कराया जा सकता है, यह निर्णय शासन स्तर पर ही संभव है और इसे जल्द लिया जाना चाहिए।
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