पश्चिम बंगाल चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की शानदार सफलता के पीछे के जमीनी कारणों पर वहां से लौटे कार्यकर्ताओं ने विस्तार से चर्चा की है। इंदौर से भाजपा के लिए चुनावी मोर्चे पर गए कार्यकर्ता विश्वजीत मलिक ने वहां के अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि राज्य में लंबे समय से व्याप्त स्थितियां भाजपा के पक्ष में बदलाव का आधार बनीं। विश्वजीत वहां करीब 6 महीने तक रहे और उन्होंने जमीनी स्तर पर जनता के बीच रहकर काम किया।
महिलाओं की सुरक्षा और विकास का अभाव
विश्वजीत मलिक के अनुसार पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कार्यकाल में विकास कार्यों की अनदेखी की गई। उन्होंने बताया कि वहां महिलाओं की सुरक्षा एक अत्यंत गंभीर मुद्दा था। शिक्षा का स्तर भी संतोषजनक नहीं पाया गया। जनता के पास ममता दीदी के सामने रखने के लिए कोई ठोस उपलब्धियां नहीं थीं। विशेष रूप से महिला मतदाता जो किसी भी चुनाव में निर्णायक भूमिका निभाती हैं उन्होंने अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए सत्ता परिवर्तन का मन बनाया। महिलाओं ने अपनी आवाज बुलंद की जिसका परिणाम चुनाव परिणामों में दिखाई दिया।
औद्योगिक गिरावट से बढ़ती गई आर्थिक चुनौतियां
राज्य में औद्योगिक स्थिति पर चर्चा करते हुए बताया गया कि बड़ी कंपनियों ने पश्चिम बंगाल से दूरी बना ली थी। सिंगूर में नैनो फैक्ट्री का बंद होना और दुर्गापुर जैसे बड़े इस्पात कारखानों की स्थिति खराब होना राज्य के लिए बड़ा झटका रहा। औद्योगिक इकाइयां बंद होने से जमीनें बंजर होने लगीं और रोजगार के अवसर समाप्त हो गए। आर्थिक मोर्चे पर राज्य पिछड़ता गया जहां प्रति व्यक्ति आय अन्य विकसित राज्यों की तुलना में काफी कम दर्ज की गई।
एसआईआर का सीधा लाभ भाजपा को मिला
क्षेत्र में युवाओं के बीच बेरोजगारी एक बड़ी समस्या के रूप में उभरी। विश्वजीत ने बताया कि 19 से 25 वर्ष की आयु के युवा रोजगार के अभाव में गलत दिशा में जा रहे थे। शिक्षा प्राप्त कर परिवार संभालने की उम्र में युवाओं के पास अवसरों की कमी थी। इसके अलावा सीमावर्ती क्षेत्रों में अवैध घुसपैठ और जनसांख्यिकीय परिवर्तनों ने भी स्थानीय राजनीति को प्रभावित किया। एसआईआर की प्रक्रिया के बाद मतदाताओं की स्थिति स्पष्ट हुई जिसका सीधा लाभ भाजपा को प्राप्त हुआ।
आरएसएस ने घर-घर जाकर काम किया
भाजपा की इस जीत में संगठन की मजबूती ने अहम भूमिका निभाई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के निरंतर दौरों और रणनीतियों ने कार्यकर्ताओं में उत्साह भरा। साथ ही अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती जैसे प्रभावशाली चेहरों के जुड़ाव ने भी माहौल बदला। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सक्रियता में भी भारी वृद्धि देखी गई। जो बूथ संख्या पहले 2000 के आसपास थी वह बढ़कर 8000 के पार पहुंच गई। संघ के कार्यकर्ताओं ने घर-घर जाकर विकास और सुरक्षा का संदेश पहुंचाया जिससे भाजपा का आधार मजबूत हुआ।
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